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Hamra Bisrab Juni (हमरा बिसरब जुनि) by Girijanand singh

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हमरा बिसरब जुनि

नौ गोट कथा सँ बनल संग्रह सौ-दू सौ वर्ष पुरान समयक यात्रा करबैत अछि एवं तरल प्रवाहमय गद्य एवं भावप्रवण चरित्र निर्माण एहि संग्रह कें अत्यधिक रोचक बनबैत अछि।
अस्तु, ई संग्रह प्रत्येक मातृभाषानुरागीक लेल पठनीय एवं संग्रहणीय अछि,  मैथिली साहित्यमे पूर्णिया परिसरक ई अद्भुत अवदान सिद्ध हएत |

Description

‘हमरा बिसरब जुनि’ पढ़ि गेलहुँ। पठनीयता अद्भुत अछि।
एहि सँ पूर्व, राजा-रजवाड़ाक कथानक पर आधारित स्व. मदनेश्वर मिश्रक उपन्यास ‘एक छलीह महारानी’ तथा लिली रेक ‘रंगीन परदा’ पढ़’ लेल भेटल छल। ओही शृंखला मे पढ़ल श्री गिरिजानंद सिंहक कथा-संग्रह ‘हमरा बिसरब जुनि’। एहि प्रकारक घराना पर लिखल रिपोर्ट वा कथा पाठक केँ बहुत आकर्षित करैत छैक, कारण अधिकतर कथा मध्य वा निम्न आय-वर्गक समाजक कथानक पर आधारित रहैत छैक। ई स्वाभाविको कारण समाज मे आ सङहि लेखक-वर्ग मे बाहुल्य मध्ये आ निम्ने आय-वर्गक लोकक छैक। तैँ राजा-रजवाड़ाक कथानक, जे विरल भेल जा रहल अछि, ताहि पर आधारित कथाक सेहो बहुत आवश्यकता छैक। एकर पूर्तिक दिशा मे गिरिजानंद बाबूक प्रयास स्तुत्य अछि। मदनेश्वर बाबू कहैत छथि जे कोना एक रानी बुद्धिमत्तापूर्वक अपन राज्य मे शासन करैत यश प्राप्त कएलनि आ कोनो (पुरुष)राजा सँ पाछाँ नहि रहलीहि। किन्तु लिली रे कह’ चाहलीहि जे बाहर सँ देखाइत उच्च घरानाक परदा तेहेन रंगीन छैक जे अन्दर मे चलि रहल रंगीनीक दृश्य देखबा मे नहि अबैत अछि।
ओहीठाम, गिरिजा बाबू एक एहेन पिक्चर सामने रखैत छथि जे राजा-रजवाड़ा मे हमरे-अहाँ सन लोक रहैत छैक – हँ, तौर-तरीका अवश्य किछु खास होइत छैक। पाठक केँ इएह औपचारिकता वा औपचारिकता मे छोट-पैघ अन्तर आकर्षित करैत छैक। कुमर सभक लालन-पोषण, शिक्षा, क्रीड़ा, अदब-आदाब, विवाह-दान, आदिक समस्त वर्णन एहि कथा सभ मे बहुत रुचिपूर्णपूर्वक कएल गेल अछि। ओझा साहेब सभक पृथक बासा, ओहि बासा सभक पृथक प्रबंधन, ड्यौढ़ी सँ औपचारिक सम्बंध, हुनकासभक रुसनाइ आ रूसल जमाए केँ रॉल्सरॉय द’ क’ मनाएब आदि बहुतो बात सँ उत्कंठा बढ़ैत छैक। आङन आ रनिवासक अलग औपचारिकता। राजाकेँ अपन छोट भाइ-बहिन सङ औपचारिकता। ई सभ औपचारिकता राजा-रजवाड़ा केँ आम सँ खास बना दैत छैक। हमर जन्म त’ आम परिवार मे भेल अछि, तथापि नहि बुझाइत अछि जे एहि सभ बातक, सङहि राजा द्वारा शासन-प्रबंधनक संतुलित परिचय देबा मे कथाकार कोनो त्रुटि रखने होथि।
हम औपचारिकताक बहुत गप कएल, किन्तु राज परिवारक रहितो गिरिजा बाबूक भाषा मे कत्तहु औपचारिकता नहि देखाइत अछि। क्लिष्टता सँ दूर, सरल-स्वाभाविक भाषा। कथा-शिल्प, बुझाइत अछि, हिनक जीन मे छनि। कथा-क्षेत्र मे जँ हिनक ई पहिल पोथी होइन (जे हमरा नहि पता) त’ आश्चर्य जे एखन धरि ई नुकाएल कतय छलाह।
एहेन उत्कृष्ट पोथीक लेल कथाकार केँ हार्दिक बधाइ एवं साधुवाद !

  • अमरनाथ मिश्र (मैथिली साहित्यकार)

Additional information

Binding

Paperback

Author(s)

Girijanand singh

Complete Book Name

Hamra Bisrab Juni (हमरा बिसरब जुनि)

ISBN

9788189450564

Language

Maithili

Product Dimension & Weight

12.8 x 1.5 x 20.5 cm

Publisher

Indica Infomedia

Total Pages

107

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