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Khurchan Bhaik Kachmachhi by Navkrishn Ehik

120.00 110.00

Maithili Satire
Paperback: 144 pages
Publisher: Mailorang Prakashan; First edition (2015)
Language: Maithili
ISBN-10: 9382828117
ISBN-13: 978-9382828112
Product Dimensions: 20.2 x 12.9 x 0.9 cm

SKU: SMN2 Category:

Description

मैथिली पढबाक नब अनुभूति अछि ‘खुरचनभाइक कछमच्छी’. खुरचनभाइ बुक सीरीजक एहि पहिल पोथी मे जनपदीय भाषाक सौन्दर्य अछि त’ व्यंग्यक नव गढ़नि पाठक कें मनोरंजित करैत अछि. खुरचनभाइ हमरा लोकनिक भीतरक ओ नीक लोक छथि, जिनका नीकक नीक आ बेजायक बेजाय चट द’ लगैत छनि. हिनक कछमच्छी हमर-अहांक ओ अव्यक्त कछमच्छी छी जे नाना व्यस्तताक कारणे मोने मे कतहु दबल रहि जाइए. विविध विषयक गप्प-सरक्का व्यंग्यक थारी मे परोसल गेल अछि जे कखनो हंसबैए, कखनो चुट द’ कटैए, कखनो सोचबा लेल मजबूर करैए. विभिन्न कथानक माध्यमे कहल गेल बात-विचार, गाम-घर, खेत-खरिहान, गाछी-दलान, दोस-भजार, हाट-बजार आदिक साक्षात करबिते अछि, संगहि हेराइत आमजन कें हेरबाक चेष्टा करैत अछि. आब जखन गामो मे गाम बांचल नहि रहि गेल अछि, गामक गप्प कें व्यंग्य मे बोरि क’ प्रस्तुत कएल गेल अछि. मैथिली मे किछु मोनक पढ़बाक हो त’ खुरचनभाइक कछमच्छी कें पढू, फील करू आ कछमछाइत रहू.|

Additional information

Binding

Paperback

Author(s)

Navkrishn Ehik

Complete Book Name

Khurchanbhaik Kachmachhi

ISBN

Language

Maithili

Product Dimension & Weight

Publisher

Mailorang Prakashan

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